26 April 2010
दिनांक : Monday, April 26, 2010 | 2 सुधीजन टिपियाइन हैं | अज़ीब आदमी, इस्मत चुग़ताई, उपन्यास अँश, डा.अमर कुमार, मुद्रण से, वेबलाग पर, साहित्य
अज़ीब आदमी

उन दिनों सरकार ने बाहर जाने पर कड़ी पाबंदी लगा रखी थी और क्योंकि बुलावा केवल धर्म और रणधीर का था, इसलिए मंगला और दिल्लू नहीं जा सकती थी। बड़ी दौड़-भाग की, लेकिन वक्त न हीं था । धर्म ने कहा कि वह भी नहीं जाएगा,...
12 April 2010
दिनांक : Monday, April 12, 2010 | 3 सुधीजन टिपियाइन हैं | ईँशा अल्लाह ख़ाँ, ब्लॉगप्रहरी, मुद्र्ण से.., रानी केतकी की कहानी, साहित्य, हिन्दी इतिहास की झलकियाँ
किसी का मुंह जो यह बात हमारे मुंह पर लावे

.... ... के हमने यह नायाब अफ़साना जो रानी केतकी के नाम से चलता है, पूरा न किया ? वापस आकर देखता हूँ, तो डेढ़ महीने पूरा होना चाहते हैं.. और रानी का किस्सा कोने पड़ा मेरी राह तक रहा है । ज़माने की रुसवाईंयों ने मुझे खुद से रुबरू होने का इतना मौका भी न दिया कि रानी को लेकर किया मेरा कौल वखत पर...
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लेबल.चिप्पियाँ
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मानवता की अनुत्तरित जिज्ञासा
नासदासीन नो सदासीत तदानीं नासीद रजो नो वयोमापरो यत किमावरीवः कुह कस्य शर्मन्नम्भः किमासीद गहनं गभीरम सृष्टि सृजन : ऋग्वेद (१०:१२९ )
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डा. अनुराग आर्य
अभिषेक ओझा
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तुम्हारे लिए - मैं उसकी हंसी से ज्यादा उसके गाल पर पड़े डिम्पल को पसंद करता हूँ । हर सुबह थोड़े वक्फे मैं वहां ठहरना चाहता हूँ । हंसी उसे फबती है जैसे व्हाइट रंग । हाँ व्...5 years ago
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कॉन्सेप्चुअल फ्रेमवर्क - सामाजिक विज्ञान को विज्ञान की उपाधि जरूर किसी ऐसे व्यक्ति ने दी होगी जिसे लगा होगा कि विज्ञान को विज्ञान कहना *डिस्क्रिमिनेशन* हो चला है। विज्ञान और तार्...5 years ago
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मछली का नाम मार्गरेटा..!! - मछली का नाम मार्गरेटा.. यूँ तो मछली का नाम गुडिया पिंकी विमली शब्बो कुछ भी हो सकता था लेकिन मालकिन को मार्गरेटा नाम बहुत पसंद था.. मालकिन मुझे अलबत्ता झल...10 years ago