6 June 2010
दिनांक : Sunday, June 06, 2010 | 7 सुधीजन टिपियाइन हैं | अमेरिका का राष्ट्रपति, कवितायें, डा. अमर कुमार, पवन करण, पहल से, मुद्रण से, विविधा, वेबलाग पर, साहित्य
अमेरिका का राष्ट्रपति… और उसके मज़े

पिछले दिनों, करीब दो-ढाई माह पहले एक फ़ीचर पढ़ा था, “ अफ़गानिस्तान में फँसा अभिमन्यु – अमेरिका “ ! हालाँकि इसमें सामयिक वस्तुस्थितियाँ पूरी ईमानदारी से बयान की गयीं थी, पर मुझे इस फ़ीचर के शीर्षक में अभिमन्यु का होना नागवार गुज़रा था । हठात मुझे बरसों पहले एक कविता याद आयी, “ अमेरिका के राश्ट्रपति के मज़े “ उसके शब्द भले ही मानस से विस्मृत...
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मानवता की अनुत्तरित जिज्ञासा
नासदासीन नो सदासीत तदानीं नासीद रजो नो वयोमापरो यत किमावरीवः कुह कस्य शर्मन्नम्भः किमासीद गहनं गभीरम सृष्टि सृजन : ऋग्वेद (१०:१२९ )
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डा. अनुराग आर्य
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